सीतामढ़ी का एक शख्स पिछले आठ सालों से शिक्षा का अलख जगा रहा है. हैरान करने वाली बात यह है कि कारी नसीर अहमद बचपन से नेत्रहीन हैं. इसके बावजूद वे शिक्षा का दीया जला रहे हैं. कारी नसीर को 600 पेज का पाक कुरआन पूरी तरह से याद है और वे बच्चों को हिफ्ज़ कराते हैं. कुरआन पाक की शिक्षा देना इनका शौक नहीं, बल्कि जुनून है. बच्चों को दी जाने वाली इस शिक्षा के बदले वे उनसे कुछ भी नहीं लेते. कारी नसीर अहमद पिछले आठ सालों से इस इलाके में बच्चों को कुरआन पाक की शिक्षा दे रहे हैं. कारी साहेब के आंखों की रोशनी बचपन से ही नहीं है. सहपाठियों की मदद से इन्होंने 600 पेज की कुरआन याद की. जिसके बाद वे अपना घर परिवार छोड़ सीतामढ़ी के मेहसौल में बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं. शिक्षा के क्षेत्र में इनके इस कदम को लेकर कई बार इन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं.
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