मधेपुरा के बाल वैज्ञानिक 9 वीं कक्षा के छात्र आनंद विजय ने एक ऐसा दरवाजा बनाया जिसमें चोरी संभव नहीं है. आग भी लगे तो घर में लोग सुरक्षित रहें और गोली चले तो अपराधी घर में ही कैद हो जाए. चित्रकार, कलाकार आनंद के कमरे का कोई कोना उसके प्रयोग और कला से खाली नहीं है. आनंद का प्रयोग सुरक्षित घर को लेकर है. लोग घर में रहते हैं फिर भी असुरक्षित महसूस करते हैं. लगभग 8 हजार की लागत से तैयार सुरक्षा उपकरण ने आनंद को बाल वैज्ञानिक की पहचान दिलाई है. मोहल्ले में लगातार हो रही चोरी की घटना ने आनंद को इस प्रयोग या कहें इस उपकरण को तैयार करने की प्रेरणा दी. पिता प्राइवेट कालेज के संगीत शिक्षक हैं, मां गृहणी और एक छोटी बहन है. जीवन गरीबी में कट रहा है इतना पैसा है नहीं जो आनंद के प्रयोग की जरुरत पूरा कर सके. फिर भी बेटे की घर छोड़ने की धमकी पर मां ने चुरा-चुरा कर आनंद की जरुरतें पूरी की. आज बेटे के प्रयोग को जब बिहार में एक मुकाम मिला तो सभी भावुक हैं.
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